IIFCL

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कार्य क्षेत्र

कार्य क्षेत्र

आईआईएफ़सीएल निम्‍नलिखित निर्दिष्‍ट क्षेत्रों में देश में अभिभावी प्राथमिकताप्राप्‍त जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं वाली वाणिज्यिक रूप से व्‍यावहारिक अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घावधि वित्‍तीय सहायता प्रदान के कार्य से जुड़ा हुआ है।

  • सड़कें तथा पुल, रेलवे, बंदरगाह, विमानपत्‍तन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तथा अन्य परिवहन परियोजनाएं|
  • विद्युत
  • शहरी परिवहन, जल आपूर्ति, मल निर्यास, ठोस कचरा प्रबंध्‍न एवं शहरी क्षेत्रों में अन्‍य भौतिक आधारिक संरचनाएं
  • गैस पाइपलाइन
  • विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों में आधारभूत परियोजनाएं|
  • अंतर्राष्ट्रीय परंपरागत केंद्र तथा अन्य पर्यटन आधारिक संरचनाएं
  • शीत भंडारण श्रृंखलाएं
  • गोदाम
  • खाद विनिर्माण उधोग

वित्तपोषण के माध्यम:

कंपनी वित्तीय निम्‍नलिखित के माध्‍यम से वित्‍तीय सहायता प्रदान करती है:

  • दीर्घावधि ऋण
  • बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को उनके द्वारा प्रदान किए गये ऋणों के लिए पुनर्वित्‍त
  • टेकआउट वित्तपोषण
  • गौण ऋण
  • कोई अन्‍य विधि जो समय-पर वित्‍त मंत्रालय द्वारा अनुमोदित हो

शुरू की गई नवीन योजना (प्रायोगिक लेन-देन के आधार पर)

ऋण वृद्धि :

प्रायोगिक लेनदेनों की शुरूआत करने के लिए 5 जनवरी, 2012 को आईआईएफसीएल की ऋण वृद्धि योजना का शुभारंभ किया गया था एवं सैद्धांतिक अनुमोदन के बाद माननीय वित्‍त मंत्री की उपस्थिति में पहला प्रायोगिक लेनदेन सौंपा गया था। इस प्रयास में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) आईआईएफसीएल के अंतर्निहीत परियोजना जोखिम की 50 प्रतिशत तक की बैकस्‍टॉप गारंटी सुविधा उपलब्‍ध कराते हुए आईआईएफसीएल को मदद देने की प्रतिबद्धता दर्शाते हुए भाग ले रहा है। प्रायोगिक चरण में 4-5 प्रयोगों की शुरूआत की गयी। आईआईएफसीएल ने प्रायोगिक लेनदेन शुरू करने के लिए ऋण वृद्धि योजना के तहत पहले प्रायोगिक लेददेन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है जो अवसंरचना क्षेत्र को बीमा कंपनी एवं पेंशन निधि जैसे काफी हद तक अप्रयुक्‍त स्रोतों से दीर्घावधि निधियों के उपयोग को युक्तियुक्‍त बनाने में सामर्थ्‍यकारी होगी। ऋण वृद्धि योजना परियोजनागत विकासकों को बांड बाजारों से किफायती स्थिर दर पर निधि जुटाने में सहायक होगी जिसके परिणामस्‍वरूप भारत में कार्पोरेट बांड बाजार के विकास में मदद मिलेगी।