IIFCL

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रूपरेखा

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भविष्‍य की नींव का निधिकरण

भारत सरकार के पूर्ण स्‍वामित्‍वाधीन आईआईएफसीएल की स्‍थापना वर्ष 2006 में की गई थी जिसका मुख्‍य उद्देश्‍य इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनैंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) नामक विशेष प्रयोजन माध्‍यम व्‍यापक तौर पर सिफ्टी के रूप में संदर्भित के माध्‍यम से व्‍यावहारिक अवरंचना परियोजनाओं को दीर्घावधि ऋण उपलब्‍ध कराना है।

आईआईएफसीएल से वित्‍तीय सहायता के पात्र क्षेत्र भारत सरकार द्वारा यथा अनुमोदित एवं समय-समय पर संशोधित अवसंरचना उप क्षेत्र की समन्वित सूची के अनुसार होते हैं। इन क्षेत्रों में आम तौर पर परिवहन, ऊर्जा, जल, स्‍वच्‍छता, संचार, सामाजिक व वाणिज्यिक अवसंरचना शामिल हैं।

आईआईएफसीएल सितंबर, 2013 से भारतीय रिजर्व बैंक से एनबीएफसी-एनडी के तौर पर पंजीकृत कंपनी है।

31 मार्च, 2019 को कंपनी की प्राधिकृत पूंजी एवं चुकता पूंजी क्रमश: 6,000 करोड़ रुपये एवं 4,202 करोड़ रुपये रही।

स्‍टैंडअलोन आधार पर आईआईएफसीएल ने 31 मार्च, 2019 तक 483 परियोजनाओं को प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत 86,403 करोड़ रूपये का संचयी सकल संस्‍वीकृतियां की एवं (पुनर्वित्‍त के तहत 11,281 करोड़ रूपये व व टेकआउट वित्‍त के तहत 15,413 करोड़ रूपये के संवितरण सहित) 65,866 करोड़ रूपये का संचयी संवितरण किया।  

 वर्तमान प्रस्‍ताव

आईआईएफसीएल ने निम्‍नलिखित उत्‍पादों/सेवाओं के माध्‍यम से अवसंरचना क्षेत्र को अपनी वित्‍तीय सहायता पेश की हैं: 


ग्रीनफील्‍ड परियोजना के लिए

प्रत्‍यक्ष ऋण

अधिमानी कर्ज:  : सहायता संघ के भाग के तौर पर आईआईएफसीएल कुल परियोजना लागत (गौण कर्ज यदि कोई हो सहित) के 20 प्रतिशत तक के निवेश को ध्‍यान में रखते हुए वाणिज्यिक रूप से व्‍यावहारिक अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घावधि निधि उपलब्‍ध कराता है। जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं जिनमें समापन पर प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य बाईबैक का प्रावधान है के मामले में आईआईएफसीएल अन्‍य ऋणदाताओं की तुलना में अधिक से अधिक अवधि के ऋण का प्रस्‍ताव कर सकता है एवं अन्‍य ऋणदाताओं को भुगतान करते हुए एकमात्र ऋणदाता बन सकता है यदि आवश्‍यक हो।

गौण कर्ज:  आईआईएफसीएल परियोजना लागत (कुल परियोजना लागत के 20 प्रतिशत के अपने निवेशे के भाग के तौर पर) 10 प्रतिशत तक का गौण कर्ज उपलब्‍ध कराता है। कर्ज का यह स्‍वरूप आमतौर पर ऋणदाताओं क्षरा अर्ध इक्विटी के तौर पर समझा जाता है।

31 मार्च, 2019 तक स्‍टैंडअलोन आधार पर आईआईएफसीएल ने प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत 483 परियोजनाओं को 86,403 करोड़ रूपये की संचयी सकल संस्‍वीकृतियां की एवं प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत 39,172 करोड़ रूपये का संचयी संवितरण किया।


ब्राउनफील्‍ड परियोजना के लिए

टेकआउट फाइनेंस

आईआईएफसीएल की टेकआउट वित्‍त योजना का उद्देश्‍य बैंकों की बही से ऋण लेने बैंकों के सामने आ रही आस्ति देयता असंतुलन एवं निवेश की बाधाओं का समाधान करना है। यह योजना बैंकों को अपनी निधियों की नई अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश करने में सहायता करती है। आईआईएफसीएल कुल परियोजना लागत (प्रत्‍यक्ष ऋण साहित) का 30 प्रतिशत तक का ऋण प्रदान कर सकता है। टेकआउट वित्‍त के मामले में संवितरण वास्‍तविक वाणिज्यिक तिथि (सीओडी) के एक वर्ष पश्‍चात ही किया जा सकता है।

आईआईएफसीएल ने 31 मार्च, 2019 तक टेकआउट वित्‍त योजना के तहत 108 परियोजनाओं में 24,393 करोड़ रूपये की संचयी संस्‍वीकृतियां की एवं 15,413 करोड़ रूपये संवितरित किए।


ऋण संवृद्धि योजना

ऋण संवृद्धि योजना के तहत आईआईएफसीएल मौजूदा ऋणों का पुनर्वित्‍त करने के लिए एए अथवा उससे अधिक की रेटिंग वाली अवसंरचना कंपनियों को जारी बांडों की ऋण रेटिंग बढ़ाने के लिए अपनी आंशिक ऋण गारंटी प्रदान करता है। आईआईएफसीएल परियोजनागत बांडों की कुल राशि के अधिकतम 50 प्रतिशत के अधीन कुल परियोजना लागत (बैकस्‍टॉप गारंटीकर्ता के साथ कुल परियोजनागत लागत का 40 प्रतिशत) के 20 प्रतिशत की सीमा तक की ऋण वृद्धि कर सकता है।

ऋण संवृद्धि बीमा व पेंशन निधि जैसे निवेशकों के ऐसे बांडों से दीर्घावधि की निधियों के वितरण का सुलभ बनाता है।

आईआईएफसीएल वर्ष 2015-16 में ऋण संवृद्धि योजना का सफलतापूर्वक प्रचालन करने वाला पहला संगठन बना। अभी तक 1,338 करोड़ रुपये के बॉण्‍ड आकार की आईआईएफसीएल की प्रारंभिक गारंटी के साथ तीन लेन-देन पूरे किए गये। 31 मार्च, 2019 तक आईआईएफसीएल ने 8,380 करोड़ रुपये के बॉण्‍ड निर्गत आकार एवं 2,256 करोड़ रुपये की आईआईएफसीएल की प्रारंभिक गारंटी संस्‍वीकृत कीं।


संस्‍थानों के लिए

पुनर्वित्‍त योजना

आईआईएफसीएल बैंकों एवं अन्‍य पात्र वित्‍तीय संस्‍थानों (एफआई) को अवसंरचना परियोजनाओं को अपना ऋण प्रदान करने के लिए पुनर्वित्‍त प्रदान करता है।

आईआईएफसीएल ने 31 मार्च, 2019 तक पुनर्वित्‍त योजना के तहत 11,281 करोड़ रूपये से संचयी संवितरण किया।


सहायक कंपनियां


आईआईएफसी (यूके):  आईआईएफसीएल ने अप्रैल, 2008 में अपने पूर्ण स्‍वामित्‍वाधीन सहायक कंपनी आईआईएफसी (यूके) की स्‍थापना की जिसका उद्देश्‍य देश में अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्‍वयन करने वाली भारतीय कंपनियों को विशेष तौर पर पूंजीगत उपकरणों के आयात के लिए विदेशी मुद्रा में वित्‍तपोषण करना है। आईआईएफसी (यूके) ने 31 मार्च, 2019 तक 2.05 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का संचयी संवितरण किया।

आईआईएफसीएल प्रोजेक्‍ट्स लि. (आईपीएल):  आईपीएल, आईआईएफसीएल की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी, की स्‍थापना वर्ष 2012 में ऐसी समर्पित परियोजना सलाहकार कंपनी के तौर पर की गई थी जो परियोजना के मूल्‍यांकन एवं कर्ज का समूहन, कार्य संपादन सलाहकार एवं अवसंरचना संबंधी परामर्शी सेवाओं के क्षेत्र में जुड़ी हो। आज की तिथि तक कंपनी ने लगभग 100,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत वाली अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्‍यांकन किया। कंपनी ने हाल ही में ऊर्जा संयत्रों को कचरा का वित्‍तीय संपान पूरा किया। कंपनी विभिन्‍न क्षमताओं के साथ केंद्र सरकार के मंत्रालय जैसे जहाजरानी मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय से जुड़ी है। कंपनी ने ओयूआईडीएफ, एमएसआरडीसी, एचपीआईडीबी, केआईआईएफबी जैसी राज्‍य सरकार की विभिन्‍न संस्‍थाओं को सक्रिय रूप से सलाह दी है/सलाह दे रही है। कंपनी को आईपीए, सागरमाला विकास निगम (एसडीसी), गोवा पर्यटन विभाग, जलवायु बॉण्‍ड की शुरूआत इत्‍यादि जैसी विभिन्‍न एजेंसियों ने सूचीबद्ध किया है। कंपनी ने विभिन्न संस्‍थाओं के लिए जलवायु परिवर्तन की प्रभावशीलता एवं लचीला व टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण पर निधि जुटाने के उद्देश्‍य से क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाया। वर्तमान में, आईपीएल को मेघालय सरकार ने एमआईडीएफ़सी के तहत परियोजना निर्धारण, अधिप्राप्ति, परियोजना विकास और क्षमता निर्माण में सहायता करने के लिए एक परियोजना विकास सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है। आईपीएल को विभिन्न मंचों, सम्मेलनों, गोल मेज चर्चाओं, समितियों आदि में बुनियादी ढांचे के विकास पर अपनी सूचनाओं के लिए नियमित रूप से में आमंत्रित किया जाता है।

आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटैड (आईएएमसीएल): आईआईएफसीएल ने आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड (आईडीएफ) का प्रबंध करने के लिए पूर्ण स्‍वामित्‍वाधीन सहायक कंपनी - आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटेड यानि आईएएमसीएल) गठित की। आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड द्वारा फरवरी, 2014 को निजी स्‍थानन के माध्‍यम से अपनी पहली आईडीएफ योजना का शुभारंभ किया गया जिसमें कंपनी ने सफलतार्वूक 300 करोड़ रुपये जुटाए। इस योजना ने बांबे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध किए जाने वाली देश में पहली आईडीएफ म्‍यूचुअल फंड होने का गौरव प्राप्‍त किया। इसके अतिरिक्‍त अप्रैल, 2017 में आईएएमसीएल ने छ: संस्‍थागत निवेशकों के साथ 200 करोड़ रुपये की निधि वाली एएए रेट वाली अपनी दूसरी आईडीएफ श्रृंखला II योजना सफलतापूर्वक पूरी की। 31 मार्च, 2019 को आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड (आईडीएफ) श्रृंखला – I एवं श्रृंखला – II के प्रबंधन के तहत कुल आस्ति (एयूएम) 559.30 करोड़ रुपये थी।

वित्‍तपोषण के स्रोत

आईआईएफसीएल अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार के अलावा घरेलू स्रोत दोनों से दीर्घावधि संसाधन के माध्‍यम से निधि जुटाता है।

घरेलू स्रोत

आईआईएफसीएल इस प्रयोजनार्थ सृजित विभिन्‍न यथोचित लिखतों से बाजार से कर्ज (अल्‍पावधि एवं दीर्घावधि दोनों) जुटाता है। कंपनी ने 31 मार्च, 2019 तक घरेलू बाजार से लगभग 32,600 करोड रुपये जुटाए।

अंतर्राष्‍ट्रीय स्रोत

आईआईएफसीएल ने एडीबी, विश्‍व बैंक, केएफडब्‍ल्‍यू, यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) एवं जापान इंटनरेशनल कोओपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) जैसे द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय वित्‍तीय संस्‍थानों से मजबूत संबंध स्‍थापित किए हैं एवं इन संस्‍थानों से क्रमश: 1.9 बिलियन अमरीकी डॉलर, 195 मिलियन अमरीकी डॉलर, 50 मिलियन यूरो, 200 मिलियन यूरो एवं 50 बिलियन जेपीवाई की ऋण व्‍यवस्‍था संपन्‍न की है।
इन संबंधों से आईआईएफसीएल को दीर्घावधि संसाधन जुटाने में मदद मिली है जिससे नवोन्‍मेषी वित्‍तीय उत्‍पाद का विकास एवं बेहतर प्रथाएं अपनाने विशेषतौर पर पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा ढांचा एवं खरीद प्रक्रियाओं को समर्थ बनाते हैं।

रेटिंग

विभिन्‍न रेटिंग एजेंसियों द्वारा आईआईएफसीएल की विभिन्‍न घरेलू दीर्घावधि उधारियों (बांड) को ‘एएए/एएए(एसओ)’ एवं एसएंडपी द्वारा बीबीबी की रेटिंग दी गयी है जो सर्वोत्‍कृष्‍ट रेटिंग के बराबर है।


आईआईएफसीएल एक नजर में

मुख्‍य वित्‍तीय विवरण

                                                                                                                             आंकड़े करोड़ रूपये में

ब्‍यौरेमार्च, 2015 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्षमार्च, 2016 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्षमार्च, 2017 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्षमार्च, 2018 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्षमार्च, 2019 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्ष
कुल आस्तियां39,06442,27442,15743,21043,544
निवल मूल्‍य (वित्‍तीय वर्ष के 31 मार्च को)6,7967,2657,4246,4024,689
निवल लाभ75346869(1155)102
अवसंरचना ऋण26,99531,61234,07032,58535,130



आईआईएफसीएल का क्षेत्र-वार निवेश

                                                                     प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत संचयी सकल संस्‍वीकृतियां (31 मार्च, 2019 तक)

                                                                                                          

                                                                                                                                                                                                                                                                            आंकड़े करोड़ रूपये में

क्षेत्र परियोजनाओं की संख्‍या परियोजना की लागत संस्‍वीकृत राशि
सड़क 255280,30739,151
विद्युत 149402,26736,110
विमानपत्‍तन 3 27,701 2530
पत्‍तन 18 26,120 3,657
शहरी अवसंरचना 1648,1433,807
रेलवे 3 3,194 639
पीएमडीओ* 38 8,602 260
दूरसंचार 1 3,750 250
योग 483 800,083 86,403



क्षेत्र-वार संचयी संवितरण (31 मार्च, 2019 तक)

                                                                                                            

                                                                                                                                                                                           आंकड़े करोड़ रूपये में

क्षेत्र परियोजनाओं की संख्‍या परियोजना की लागत संवितरित राशि
प्रत्‍यक्ष ऋण
सड़क 185196,51219,409
विद्युत 96225,42117,203
विमानपत्‍तन 3 27,701 858
पत्‍तन 1113,307953
शहरी अवसंरचना 71,780305
रेलवे 1 600 44
पीएमडीओ* 27 4,744 151
दूरसंचार 1 3,750 248
योग (क) 331473,81539,172
टेकआउट वित्‍त
सड़क 22 30,551 4,115
विद्युत 26 50,972 7,800
विमानपत्‍तन 2 15,777 1,485
पत्‍तन 5 9,392 1,988
शहरी अवसंरचना 2 107 26
योग (ख) 57 106,799 15,413
उप-योग (क + ख) - - 54,585
पुनर्वित्‍त (ग) - - 11,281
कुल योग (क + ख + ग) - - 65,866