IIFCL

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संशोधित टेकआउट वित्तीय योजना

संशोधित टेकआउट वित्तीय योजना

अर्थक्षम अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु टेकआउट वित्तपोषण पोषण योजना

प्रस्‍तावना

वर्ष 2009-10 के केंद्रीय बजट भाषण में माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा ‘बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष प्रयोजन माध्यम के तौर पर इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लि. (आईआईएफसीएल) की स्थापना की। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आईआईएफसीएल अधिक से अधिक लोचनीयता के साथ तेजी से अपना अधिदेश पूरा करे। टेकआउट वित्तपोषण बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु दीर्घकालिक निधियां जारी करने की एक स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय प्रथा है। इसे बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के वित्तपोषण से वाणिज्यिक बैंकों में उतपन्‍न आस्ति-देयता असंतुलन के प्रभावी समाधान में इस्तेमाल किया जा सकता है एवं नई परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए मुक्त पूंजी के लिए भी किया जा सकता है। आईआईएफसीएल बैंकों से परामर्श करके टेकआउट वित्तपोषण पोषण येाजना विकसित करेगा जो बुनियादी ढांचा क्षेत्र को वृद्धिशील ऋण की सुविधा प्रदान कर सके। ‘कार्रवाई का अनुपालन करते हुए आईआईएफसीएल ने प्रमुख पणधारकों के साथ परामर्शी प्रक्रिया शुरू की एवं ‘टेकआउट वित्तपोषण योजना’ तैयार की। अधिकारप्राप्त समिति ने 1 दिसंबर, 2011 को आयोजित अपनी 15वीं बैठक, 18 सितंबर, 2013 को आयोजित 17वीं बैठक, 18 जून, 2014 को आयोजित 18वीं बैठक एवं 27 जनवरी, 2015 को आयोजित 19वीं बैठक में टेकआउट वित्तपोषण योजना की कुछ विशेषताओं में संशोधन किया। संशोधित टेकआउट वित्तपोषण योजना का नीचे विस्तार से उल्लेख किया गया है।

संक्षिप्त नाम एवं विस्तार

  1. इस योजना को अर्थक्षम अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु टेकआउट वित्तपोषण योजना कहा जाएगा।
  2. यह टेकआउट वित्तपोषण योजना 16 अप्रैल, 2010 से प्रभावी है।

टेकआउट वित्‍तपोषण योजना के उद्देश्य

  1. अवसंरचना परियोजनाओं वित्‍तपोषण के लिए दीर्घकालिक ऋण की उपलब्धता को बढ़ावा देना।
  2. ऐसे क्षेत्र/समूह/संस्था के एक्‍सपोजर के मुद्दों एवं ऋणदाताओं की आस्ति-देयता असंतुलन की चिंताओं का समाधान करना जो बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को ऋण का वित्तपोषण प्रदान कर रहे हैं।
  3. नये संस्थान यानि मध्यम/लघु आकार वाले बैंक, बीमा कंपनियों एवं पेंशन निधियों की सहभागिता की सुविधा प्रदान करते हुए बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण के स्रोत का विस्तार करना।

परिभाषाएं

  1. इस योजना में जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो:
  2. उधारकर्ता से वह कानूनी संस्था अभ्रिपेत है जो उस बुनियादी ढांचे की परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है जिसके लिए टेकआउट वित्तपोषण योजना के तहत आईआईएफसीएल द्वारा सहायता दी जानी है।
  3. सामान्य ऋण करार से ऋणदाता एवं उधारकर्ता के बीच हस्तारक्षरित करार अभिप्रेत है।
  4. प्रभावी तिथि से 16 अप्रैल, 2010 अभिप्रेत है।
  5. * यह संशोधित योजना 30 मार्च, 2015 से प्रभावी है।
  6. आईआईएफसीएल से इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लि. (कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन निगमित कंपनी) अभिप्रेत है।
  7. ऋणदाता से बीमा कंपनियों के सिवाय कोई भी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अथवा अन्य भाग लेने वाली संस्थां(यें) जिसने उधारकर्ता को सामान्य ऋण करार के तहत ऋण प्रदान किया है, अभिप्रेत है। शंकाओं के निवारणार्थ उधारकर्ता के प्रवर्तक (कों) अथवा प्रवर्तक (कों) से संबद्ध कंपनियां उधारकर्ता के ऐसे प्रवर्तक (कों) एवं/अथवा अपनी संबद्ध कोई कंपनियों द्वारा प्रदान किये गये किसी ऋण के वित्तपोषण के लिए ऋणदाता तैयार नहीं करेंगे।
  8. परियोजना दल से किसी बुनियादी ढांचे की परियोजना के लिए परियोजना का अनुबंध अथवा रियायती करार की अवधि अभिप्रेत है।
  9. टेकआउट शुरू होने की निश्चित तिथि से वह तिथि अभिप्रेत है जब टेकआउट करार की शर्तों के अनुसार शुरू होना निश्चित किया गया है।
  10. सिफ्टी से इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लि. (आईआईएफसीएल) नामक विशेष प्रयोजन माध्यम से अर्थक्षम अवसंरचना की परियोजना के वित्तपोषण हेतु योजना एवं आईआईएफसीएल द्वारा क्रियान्वित योजना अभिप्रेत है।
  11. टेकआउट करार/करार से टेकआउट वित्‍तपोषण योजना के प्रावधानों के अनुसार आईआईएफसीएल, चिन्हित ऋणदाता(ओं) एवं उधारकर्ता द्वारा संपन्न किया गया करार अभिप्रेत है।
  12. टेकआउट राशि से टेकआउट करार के अनुसार टेकआउट शुरू होने की निश्चित तिथि से आईआईएफसीएल द्वारा शुरू किए गये सहमत अवशिष्ट ऋण की कुल राशि अभिप्रेत है।
  13. इस टेकआउट योजना में जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, प्रयुक्त सभी बडे़ अक्षरों के शब्द एवं जो यहां परिभाषित नहीं हैं, का वही अर्थ होगा जो सिफ्टी (इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनेंस कंपनी लि. (आईआईएफसीएल) नामक विशेष प्रयोजन माध्यम से अर्थक्षम अवसंरचना परियोजना के वित्तपोषण हेतु योजना एवं आईआईएफसीएल द्वारा क्रियान्वित योजना में निर्दिष्ट है।

पात्रता

  1. योजना उधारकर्ताओं को प्रदान की जाएगी एवं आईआईएफसीएल उधारकर्ता (ओं) अथवा ऋणदाता (ओं) दोनों से प्रस्ताव प्राप्त कर सकता है।
  2. योजना हेतु पात्रता होने के क्रम में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में निम्‍नलिखित शर्तें पूरी की जानी अत्‍यंत आवश्‍यक है:
  3. बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं निम्नलिखित क्षेत्र (त्रों) से होनी चाहिए यथा सिफ्टी के खंड 5.2 (ग) में परिभाषित है जिसे वर्तमान में निम्नंलिखित के तौर पर व्याख्या की गई है: ‘ये परियोजना निम्नलिखित क्षेत्रों में से कोई एक हो सकती है:’
    1. ‘ये परियोजना निम्नलिखित क्षेत्रों में से कोई एक हो सकती है:’
      क्र.सं वर्ग अवसंरचना उप-क्षेत्र
      1 परिवहन एवं लॉजिस्‍टक सड़क एवं पुल
      पत्‍तन1
      पोत कारखाना2
      अंतरदेशीय जलमार्ग
      एयरपोर्ट
      इलेक्ट्रिकल एवं सिगनल प्रणाली, सुरंग, पुल, सेतु सहित रेल ट्रैक
      कारखाने एवं संबद्ध रखरखाव की सुविधाओं के साथ रेलवे रोलिंग स्‍टॉक स्‍टेशन एवं समीपवर्ती वाणिज्यिक अवसंरचना सहित रेलवे टर्मिनल अवसंरचना शहरी सार्वंजनिक परिवहन (शहरी सड़क परिवहन के मामले में रोलिंग स्टॉक को छोड़कर)
      लॉजिस्टिक अवसंरचना3
      2 ऊर्जा विद्युत उत्पादन
      विद्युत पारेषण
      विद्युत वितरण
      तेल पाइपलाइनें
      तेल/गैस/द्रवीभूत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भंडारण सुविधा4
      गैस पाइपलाइनें5
      3 जल एवं स्‍वच्‍छता ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन
      जल आपूर्ति पाइपलाइनें
      जल शोधन संयत्र
      मलव्‍यय संग्रहण, प्रबंधन एवं निपटान प्रणाली
      सिंचाई (बांध, चैनल, तटबंध इत्यादि)
      स्‍टोर्म वाटर निकास प्रणाली
      पतले मसाले की पाइपलाइनें
      4 संचार दूरसंचार (फिक्‍स्‍ड नेटवर्क)6
      दूरसंचार टॉवर
      दूरसंचार एवं दूरसंचार सेवाएं
      5 सामाजिक एवं वाणिज्यिक अवसंरचना शिक्षण संस्थाएं (कैपिटल स्टॉक)
      खेलकूद अवसंरचना7
      अस्‍पताल (कैपिटल स्टॉक)8
      पर्यटन अवसंरचना अर्थात (I) एक मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों से बाहर अवस्थित तीन सितारा अथवा उच्चत्‍तर श्रेणी के वर्गीकृत होटल (II) रोपवे एवं केबल कार
      औद्योगिक पार्क, तथा फूड पार्क, टैक्‍सटाइल पार्क, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), पर्यटन सुविधा तथा कृषि बाजार जैसी औद्योगिक गतिविधि सहित अन्‍य पार्कों हेतु साझी अवसंरचना
      कृषि एवं बागवानी उपज हेतु शीत भंडारण सहित कटाई उपरांत भंडारण
      अवसंरचना
      टर्मिनल बाजार
      मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं:
      प्रशीतन श्रृंखला9
      सस्‍ते आवास10

      टिप्‍पण:

      1. बडे तलकर्षण शामिल हैं।
      2. "पोत कारखाने" को तैरती हुई अथवा तटीय, घुमावदार बंदरगाह, लंगरगाह और डॉकिंग सुविधा, जलावतरण मंच और/अथवा पोत उठाव की आवश्‍यक विशेषताओं वाले जल पर अथवा भूमि पर स्थित सुविधा के रूप में परिभाषित किया गया है, और जो पोत निर्माण/मरम्‍मत/पोत तोडने के कार्यकलाप करने में सक्षम है।
      3. "लॉजिस्टिक अवसंरचना" में न्‍यूनतम 50 करोड रुपये के निवेश तथा 10 एकड़ के न्‍यूनतम क्षेत्रफल के साथ अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी), 15 करोड़ रुपये के न्‍यूनतम निवेश तथा 20,000 वर्ग फुट के न्‍यूनम क्षेत्रफल के साथ शीत श्रृंखला सुविधा तथा/अथवा 25 करोड़ रुपये के न्‍यूनतम निवेश तथा 1 लाख वर्ग फुट के न्‍यूनतम क्षेत्रफल के साथ भंडार गृह सुविधा सहित बहुविध लॉजिस्‍टक्‍स पार्क सम्मिलित है।
      4. कच्‍चे तेल का महत्‍वपूर्ण भंडारण शामिल है।
      5. शहरी गैस संवितरण नेटवर्क शामिल है।
      6. ऑप्टिक फाइबर/वॉयर/केबल नेटवर्क, जो ब्राडबैंड/इंटरनेट उपलब्ध कराते हैं, शामिल हैं।
      7. खेलकूद एवं खेलकूद से संबंधी कार्यकलाप में प्रशिक्षण/अनुसंधन के लिए प्रशिक्षणशालाओं हेतु खेलकूद स्‍टेडियम और अवसंरचना का प्रावधान शामिल है।
      8. चिकित्‍सा कॉलेज, पैरा – चिकित्‍सा कॉलेज प्रशिक्षण संस्‍थान तथा नैदानिक केन्‍द्र शामिल हैं।
      9. कृषि तथा संबंद्ध उताद, समुद्री उत्‍पाद तथा मांस के परिरक्षण अथवा भंडारण हेतु खेत स्‍तर की प्री-कूलिंग हेतु प्रशीतन कक्ष सुविधा शामिल है।
      10. ‘’सस्‍ते आवास’’ को एक ऐसी आवासीय परियोजना के रूप में परिभाषित किया गया है जिनमें अधिकतम 60 वर्ग मीटर के कार्पेट क्षेत्रफल@ वाली आवासीय इकाई के लिए फर्श क्षेत्रफल अनुपात (एफएसआर)/फ्लोर स्‍पेस इंडेक्‍स (एफएसआई) के कम से कम 50 प्रतिशत का उपयोग किया गया है।

      @’’कारपेट क्षेत्रफल’’ का वही अर्थ होगा जो स्‍थावर संपदा (विनियम एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 2 के खंड (ट) में दिया गया है।

      क्षेत्रों की उपरोक्‍त सूची सिफ्टी में उल्लिखित खंड 5.2 (ग) एवं इसके बाद के संशोधनों यदि कोई है, के अनुरूप होगी।

    2. बुनियादी ढाचें की वे परियोजनाएं जिन्‍होंने वित्तीय समापन का लक्ष्‍य प्राप्‍त कर लिया हो एवं जिसकी अवशिष्ट ऋण की अवधि कम से कम 6 वर्ष हो।
    3. वे परियोजनाएं जहां अनंतिम सीओडी घोषित कर दी गई हो।

टेकआउट वित्तपोषण की सीमा

  1. आईआईएफसीएल वैयक्तिक ऋणदाता (ओं) को टेकआउट शुरू होने की निश्चित तिथि को ऋण की अवशिष्ट राशि के 100 प्रतिशित की सीमा तक टेकआउट वित्तपोषण प्रदान करेगा। अग्रणी बैंक के मामले में आईआईएफसीएल ऋण की अवशिष्ट राशि के 75 प्रतिशत की सीमा तक टेकआउट वित्तपोषण प्रदान करेगा। हालांकि टेकआउट वित्तपोषण की कुल राशि टेकआउट शुरू होने की निश्चित तिथि को बुनियादी ढांचे की परियोजना के कुल अवशिष्ट ऋण के 51 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।1

टेकआउट करार एवं इसका समय निर्धारण

  1. आईआईएफसीएल, चिन्हित ऋणदाता(ओं) एवं उधारकर्ता त्रिपक्षीय करार यानि टेकआउट वित्तपोषण योजना के अनुरूप टेकआउट करार संपन्न करेंगे।
  2. उन परियोजनाओं के लिए जहां वित्तीय समापन अभी संपन्न किया जाना है, आईआईएफसीएल परियोजना के वित्तीय समापन के समय पर टेकआउट करार संपन्न करेगा। ऐसा करार परियोजना के सामान्य ऋण करार के साथ हस्ताक्षरित किया जाएगा।
  3. वे परियोजनाएं जहां वित्तीय समापन संपन्न कर लिया गया है एवं जिसकी अवशिष्‍ट ऋण की अवधि कम से कम 6 वर्ष है तो आईआईएफसीएल तब टेकआउट करार संपन्न करेगा जब प्रासंगिक उधारकर्ता एवं ऋणदाता(ओं) प्रभावी तिथि को अथवा उसके बाद किसी समय आईआईएफसीएल से संपर्क करेगा।
  4. आईआईएफसीएल बोली पूर्व चरण में पीपीपीएसी/ईसी/ईआई द्वारा अनुमोदित जन निजी भागीदारी (पीपीपी) की बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में टेकआउट के ‘सैद्धांतिक’ अनुमोदन पर विचार कर सकता है जो टेकआउट वित्तपोषण योजना के प्रावधानों के अनुरूप शर्तों के अधीन होगा।

टेकआउट वित्तपोषण की अवधि

  1. टेकआउट का संवितरण, आमतौर पर पीपीपी आधारित सड़क परियोजनाएं (वार्षिक आधार पर), पीपीपी विद्युत पारेषण परियोजनाएं (पीपीपीएसी/ईसी/ईआई द्वारा अनुमोदित) एवं ऐसे अन्य क्षेत्र जो अधिकारप्राप्त समिति द्वारा अनुमोदित हो, जहां टेकआउट सीओडी अथवा अनंतिम सीओडी के तुरंत बाद किया जा सकता है, के सिवाय वास्तविक वाणिज्यिक प्रचालन तिथि (सीओडी) अथवा अनंतिम सीओडी के एक वर्ष के पश्चात किया जाएगा। हालांकि सभी मामलों में सीओडी अथवा अनंतिम सीओडी के तुरंत बाद टेकआउट के लिए विचार करने से पूर्व ऋण शोधन क्षमता का आंकलन किया जाना चाहिए।
  2. आईआईएफसीएल के पास टेकआउट राशि की अवधि परियोजना की उपयोगिता काल के 85 प्रतिशत से अधिक न हो। पीपीपीएसी/ईसी/ईआई द्वारा अनुमोदित पीपीपी परियोजनाओं के मामले में जहां समापन पर प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य वापसी क्रय नीति (बाईबैक) का प्रावधान है, आईआईएफसीएल अन्य ऋणदाताओं को राशि चुकाने के पश्चात एकमात्र ऋणदाता रह सकता है।
  3. गैर पीपीपी बिजली उत्पादन परियोजनाओं के मामले में जहां इसकी क्षमता की अधिकता हेतु राज्य उपादेयताओं के साथ दीर्घकालिक बिजली क्रय करार किया गया है, आईआईएफसीएल अन्य ऋणदाताओं को राशि चुकाने के पश्चात एकमात्र ऋणदाता रह सकता है; हालांकि आईआईएफसीएल टेकआउट की अवधि परियोजना की उपयोगिता काल के 85 प्रतिशत से अधिक न हो। ऐसी गैर पीपीपी परियोजनाओं के मामले में जहां आईआईएफसीएल मौजूदा ऋणदाताओं की अवधि की तुलना में लंबी अवधि के टेकआउट पेश करता है, आईआईएफसीएल का जोखिम, नियंत्रक कंपनी से गारंटी मांगने अथवा अवलंब के किसी अन्य स्वरूप में कवर होगा।

ब्याज दर

  1. टेकआउट शुरू होने की निश्चित तिथि को आईआईएफसीएल द्वारा लिए गये ऋण हेतु ब्याज दर, सीओडी के पश्चात दो प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियों के ऋण जोखिम रेटिंग एवं जो आधार दर जमा (+) जोखिम प्रीमियम के माध्‍यम से परिलक्षित हो, के आधार पर होगी । उक्त हेतु विस्तृत दिशानिर्देंश इस दस्तावेज के अनुलग्नक में प्रदान किये गये हैं।

टेकआउट शुल्क

  1. टेकआउट वित्तपोषण येाजना के तहत आईआईएफसीएल से टेकआउट वित्तपोषण प्राप्त करने वाले उधारकर्ता आईआईएफसीएल को 30 प्रतिशत का टेकआउट शुल्क (लिये गये ऋण की ब्याज दर* राशि में अंतर) अदा करेगा जो आईआईएफसीएल द्वारा ऋणदाता (ओं) को आगे बढ़ाया जाएगा।
  2. हालांकि टेकआउट शुल्क ऐसे मामलों में देय नहीं होगा जहां उधारकर्ताओं को पूर्व भुर्गतान शुल्क/प्रभार विप्रेषित करना आवश्यक है एवं उधारकर्ता या तो पूर्व भुगतान शुल्क/प्रभार विप्रेषित कर सकता है अथवा टेकआउट शुल्क/विप्रेषित कर सकता है।

मूल्यांकन एवं निगरानी एवं वसूली

  1. टेकआउट करार आईआईएफसीएल द्वारा प्रतिष्ठित मूल्यांनकर्ता संस्थान द्वारा किए गये संतोषजनक मूल्‍यांकन के आधार पर हस्ताक्षरित किया जाएगा एवं उक्त अग्रणी बैंक द्वारा स्वीकार एवं अपनाया जा रहा हो, एवं अपने स्वयं के सम्यक उद्यम के अधीन होगा।
  2. आईआईएफसीएल सहमत करार एवं कार्य निष्पादन स्तर के साथ परियोजना के अनुपालन का समय-समय पर मूल्यांकन करेगा।
  3. अग्रणी बैंक/ऋणदाता संघ के साथ आईआईएफसीएल सहमत करार एवं कार्य निष्पादन स्तर के साथ परियोजना के अनुपालन की नियमित निगरानी एवं आवधिक मूल्यांकन के लिए उत्तरदायी होगा। अग्रणी बैंक/ऋणदाता ऐसे स्वरूप में एवं ऐसे समय पर आवधिक प्रगति रिपोर्ट भेजेगा जो आईआईएफसीएल निर्धारित करे।

टेकआउट वित्तपोषण योजना की अन्य विशेषताएं

  1. बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के संबंध में, टेकआउट वित्तपोषण योजना हेतु पात्र लेकिन जिनका प्रभावी तिथि को वित्तीय समापन प्राप्त करना बाकी है, आईआईएफसीएल ऋणदाताओं के साथ सिफ्टी के तहत कुछ प्रत्यक्ष एक्‍सपोजर भी कर सकता है।
  2. टेकआउट वित्तपोषण के मामले में प्रत्यक्ष ऋण सहित आईआईएफसीएल का कुल एक्‍सपोजर कुल परियोजना लागत के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा जो लागू विनियामक मानदंडों के अधीन होगा।
  3. टेकआउट करार संपन्न करने के पश्चात यदि आईआईएफसीएल के संज्ञान में उधारकर्ता द्वारा की गई कोई धोखाधड़ी अथवा जालसाजी सामने आती है तो टेकआउट करार समाप्त हो जाएगा।
  4. टेकआउट शुरू करने की निश्चित तिथि को टेकआउट केवल उन ऋणों के संबंध में ही निष्पादित किया जाएगा जो टेकआउट करार पर हस्ताक्षर करने वाले ऋणदाताओं की बही में मानक आस्तियों के तौर पर वर्गीकृत हैं।
  5. टेकआउट शुरू करने की निश्चित तिथि को टेकआउट तभी निष्पादित किया जाएगा यदि ऋणदाताओं के मामले में परियोजना का ऋण सेवा कवरेज अनुपात एक जैसा है एवं कोई मामला 1.0 से कम न हो।
  6. टेकआउट शुरू होने के समय पर टेकआउट वित्तपोषण योजना के प्रावधानों के अधीन टेकआउट करार संपन्न करने वाले ऋणदाता(ओं) एवं आईआईएफसीएल का यह दायित्व होगा कि वे टेकआउट वित्तपोषण योजना बिना किसी विरोध प्रदर्शन, प्रतिद्वंदता अथवा आपत्ति के लागू करे।
  7. टेकआउट शुरू होने से पूर्व अथवा इसके उपरांत उधारकर्ता के पास किसी भी समय पर सामान्य ऋण करार एवं टेकआउट करार के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार ऋण चुकाने का विकल्प होगा।
  8. टेकआउट करार संपन्न करने के पश्चात लेकिन ऋण लेने से पूर्व यदि ऋणदाता ऋण की शर्तों यानि ऋण की पुनर्रचना अथवा संबंधित मामलों में कोई बदलाव का प्रस्ताव रखता है तो आईआईएफसीएल को ऋणदाताओं की अंतर-ऋणदाता करार के अनुसार, आयोजित होने वाली प्रासंगिक बैठक में भाग लेने के आमंत्रित किया जाएगा एवं टेकआउट करार की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए ऋणदाताओं को आईआईएफसीएल के विचार भी ध्यान में रखने होंगे। यदि आईआईएफसीएल ऋणों की पुनर्रचना करने के लिए सहमत नहीं है तो आईआईएफसीएल के पास टेकआउट करार से बाहर निकलने का विकल्प होगा।
  9. ऋण लिये जाने के पश्चात आईआईएफसीएल अंतर-ऋणदाता करार का पक्ष बन जाएगा।
  10. आईआईएफसीएल के पास परियोजना की जमीनी वास्तविकताओं एवं नकदी प्रवाह के अनुरूप लिए गये ऋणों की पुनर्रचना करने का विकल्प होगा। ऐसी पुनर्रचना में परियोजना में ऋण वित्‍तपोषण की सीमा बढाना शामिल हो सकता है। हालांकि किसी ऐसे विकल्प का प्रयोग अंतर ऋणदाता करार के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
  11. परियोजना में किसी लागत वृद्धि के कारण निधि के लिए जुटाई गये ऋण की कोई राशि तभी कवर होगी यदि उक्त पर ऋणदाताओं की सहमति हो।
  12. एक बार जब टेकआउट, टेकआउट करार के अनुरूप प्रभावी हो जाता है तो परियोजना की आस्तियों में आईआईएफसीएल सुरक्षा ब्याज एवं नकदी प्रवाह, ऋणदाता(ओं) द्वारा प्रदान किए गये अधिमानी कर्ज के साथ सममात्रा की श्रेणी में आएंगे।
  13. स्टांप ड्यूटी सहित कानूनी लागत वे उधारकर्ता वहन करेंगे जिन्होंने टेकआउट वित्तपोषण योजना का लाभ उठाया है।