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सीएसआर परियोजनाएं

सीएसआर परियोजनाएं

बोड़सिमालुगुड़ी-उत्‍तर-पूर्व का सबसे पहला स्‍मार्ट गांव

आईआईएफसीएल ने एचआईएमसीओएन की साझेदारी के साथ असम के बाक्‍सा जिले के बोड़सिमालुगुड़ी गांव को गोद लिया है जो कि तत्‍कालीन योजना आयोग द्वारा पिछड़े गांव के तौर पर अधिसूचित है। इस पहल के तहत बोड़सिमालुगुड़ी को मॉडल गांव में बदला गया है जो कि अब खुले में शौच से मुक्‍त गांव है। इसके अलावा गांव सामुदायिक आरओ जल संयत्र, सौर ऊजा से प्रकाशित घर एवं सौर ऊर्जा से जगमगाती गलियां एवं अन्‍य मूलभूत सुविधाओं से युक्‍त है। इस कार्यक्रम के कारण इस गांव के कुल 744 परिवार लाभान्वित हुए हैं।



टीओपी योजना - बैडमिंटन व तीरंदाजी एथलीटों का विकास

आईआईएफसीएल ने खेल एवं युवा मंत्रालय की साझेदारी के साथ ओलंपिक एवं इसी तरह के राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय ख्‍यातिप्राप्‍त कार्यक्रमों में संभावित पदक विजेता तैयार करने के लिए बैडमिंटन एवं तीरंदाजी खेल विषय के तहत खिलाड़ी चिन्हित किए। इस पहल के तहत जिन एथीलीटों की सहायता की गई उनमें से कुछ निम्‍नानुसार हैं :-

बैंडमिंटन:-

सुश्री साइना नेहवाल, सुश्री पीवी सिंधु, श्री श्रीकांत किदांबी, सुश्री ज्‍वाला गट्टा, सुश्री अश्‍वनि पोन्‍नप्‍पा, श्री मन्‍नू अत्री एवं श्री बी. सुमित रेड्डी

तीरंदाजी:-

सुश्री दीपिका कुमारी, सुश्री लक्ष्‍मी रानी मांझी, सुश्री एल बोम्‍बायला देवी एवं श्री अतनु दास।

आईआईएफसीएल को खेलों को बढ़ावा देने के इसके सीएसआर योगदान के लिए महामहिम राष्ट्रपति, भारत द्वारा "राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2016" से सम्मानित किया गया जो कारपोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्व के माध्यम से खेलों को बढ़ावा देने वाला सर्वोच्‍च राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार है।

कौशल विकास

  1. नागपुर (महाराष्‍ट्र) में सफाई कर्मचारियों का सशक्‍तीकरण

    आईआईएफसीएल ने एनएसकेएफडीसी की साझेदारी के साथ नागपुर (महाराष्‍ट्र) में 150 बेरोजगार युवा सफाई कर्मचारी, मेहतर एवं उनके आश्रितों के कौशल विकास के लिए यह कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम के तहत प्रतिभागयों को यांत्रिकी, सौंदय प्रसाधन (ब्यूटीशियन) व सिलाई के एनसीवीटी मान्यता प्राप्त विषयों में प्रशिक्षित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत कुल 85 प्रतिभागियों को रोजगार मिला एवं शेष लोगों को एनएसकेएफडीसी से स्‍व-रोजगार से रियायती ऋण उपलब्‍ध कराया गया।

  2. आंध्र प्रदेश एवं केरल में युवाओं के लिए रोजगारपरक कौशल विकास

    आईआईएफसीएल ने आईटीसीओटी कंसल्‍टैंसी एंड सर्विसेज की साझेदारी के साथ कौशल विकास कार्यक्रम पूरा किया जिसमें प्रमुख विशेषताओं में आंध्र प्रदेश के चित्‍तूर जिले एवं केरल के पलक्‍कड़ जिले में स्‍कूल छोड़ने वाले 500 स्‍कूली बच्‍चों को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल है। प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण होने पर कुल 500 छात्रों में से 377 छात्र रोजगार हासिल करने में समर्थ हुए जबकि शेष प्रतिभागियों (अधिकांशत: सिलाई का कोर्स करने वाली महिला प्रतिभागी) ने स्‍व: रोजगार का विकल्‍प चुना। रोजगार में नियोजित सभी प्रतिभागी संबंधित क्षेत्र में प्रचलित न्‍यूनतम वेतन दर से अधिक वेतन ले रहे हैं।


  3. आदिवासी महिला शिल्‍पकारों का सशक्‍तीकरण-आईआईएफसीएल लुक ईस्‍ट

    आईआईएफसीएल ने एनएसटीएफडीसी की साझेदारी के साथ आदिवासी महिला शिल्‍पकारों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम पूरा किया जिसमें उत्‍तर-पूर्व में स्थित आठ राज्‍यों में से प्रत्‍येक राज्‍य से 25 प्रतिभागियों का चयन किया गया था इस प्रकार इस कार्यक्रम में कुल 200 महिला शिल्‍पकारों ने भाग लिया। तीन माह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नई डिजाइन वाली एवं मोटरीकृत उपकरणों पर प्रशिक्षण शामिल था जिसमें 15 दिन जॉब पर प्रशिक्षण एवं दिल्‍ली व मुंबई में व्‍यापार मेले में प्रदर्शनी दौरा शामिल था।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्‍न होने पर सभी प्रशिक्षित प्रतिभागियों को स्‍वयं का कारोबार शुरू करने के लिए वजीफा के रूप में हथकरघा व सहायता प्रदान किया गया था।

पर्यावरण एवं नवीकरणीन ऊर्जा

  1. सौर ऊर्जा के माध्‍यम से रोशनी प्रदान करना

    आईआईएफसीएल ने सीईएल की साझेदारी के साथ जैसलमेर (राजस्‍थान) के गैर विद्युतिकृत गांवों में अलग-अलग परिवारों के लिए 1500 सौर गृह प्रकाश प्रणाली स्‍थापित करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरूआत की। इस कार्यक्रम में 03 सौर संचालित आरओ जल संयंत्र प्रणाली स्‍थापित करना एवं क्षेत्र के सरकार द्वारा चलाए जा रहे विद्यालयों में पूरी तरह सुसज्जित सौर ऊर्जा द्वारा संचालित कंप्यूटर प्रयोगशाला भी शामिल है। क्षेत्र के लोगों को स्‍वच्‍छ पेय जल उपलब्‍ध कराने के अलावा आईआईएफसीएल की परियोजना से क्षेत्र में रहने वाले लगभग 2200 छात्र लाभान्वित हुए जो सांयकाल के पश्‍चात अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।


  2. व्‍यापक पैमाने पर रोशनी फैलाने वाले सौर लैंप

    आईआईएफसीएल ने एसईसीआई की साझेदारी के साथ भारत के विभिन्‍न पिछड़े जिलों में 35,000 अलग-अलग लाभार्थियों को सौर लालटेन उपलब्‍ध कराने के लिए इस कार्यक्रम की शुरूआत की। भारत के 10 राज्‍यों में फैले सौर लालटेनों से गांवों में रहने वाले लोगों की मिट्टी तेल से जलने वाले लैंपों से मुक्ति मिली है एवं पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी भारी राहत मिली है।

  3. भारत पर्यावास केंद्र (आईएचसी), नई दिल्‍ली में 250 किलावोट के सौर ऊर्जा संयत्र की स्‍थापना

    आईआईएफसीएल ने पारंपरिक बिजली के सबसे अच्‍छे विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा पर ज्ञान दर्शाने, बढ़ावा देने और साझा करने के लिए, भारत पर्यावास केंद्र, नई दिल्‍ली में छत पर 250 किलोवाट सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया है। यह संयत्र के शुरू होने पर संयत्र से बहुत प्रतिस्‍पर्धी दर 4.99 प्रति इकाई की दर पर बिजली पैदा हुई जो बिजली खरीद करार की पूर्ण अवधि यानि 20 वर्ष के लिए निर्धारित है।


  4. भदोही में सौर पथ प्रकाश

    आईआईएफसीएल ने आरईआईएल की भागीदारी के साथ भदोही, उत्‍तर प्रदेश में 500 सौर पथ प्रकाश स्‍थापित किए जिससे भदोही की गलियां जगमगा रही हैं एवं स्‍थानीय लोगों द्वारा इस कार्य की सराहना की जा रही है चूंकि इससे स्‍थानीय लोगों को सांयकाल के पश्‍चात रोशनी से युक्‍त समय मिल गया है।

स्‍वच्‍छता एवं पेयजल – स्‍वच्‍छ भारत

  1. मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) में सरकार द्वारा सहायताप्राप्‍त विद्यालयों में कन्‍याओं के लिए शौचालय परिसर का निर्माण:-

    आईआईएफसीएल ने अपनी इस पहल के तहत पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के सरकार द्वारा सहायताप्राप्‍त 45 कन्‍या विद्यालयों में 318 शौचालय इकाईयों वाले कुल 45 शौचालय परिसरों का निर्माण किया है। आईआईएफसीएल ने यह परियोजना वित्‍त वर्ष 2012-13 में प्रारंभ की थी। वर्तमान में इन विद्यालयों में नामांकित लगभग 13500 छात्राएं इन शौचालयों से लाभान्वित हुई हैं।

  2. शिवंगगा जिला (तमिलनाडु) में सरकार द्वारा सहायताप्राप्‍त विद्यालयों में कन्‍याओं के लिए शौचालय परिसर का निर्माण:-

    आईआईएफसीएल ने अपनी इस पहल के तहत तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के सरकार द्वारा सहायताप्राप्‍त 15 विद्यालयों में 212 शौचालय इकाईयों वाले कुल 28 शौचालय परिसरों का निर्माण किया है। आईआईएफसीएल ने यह परियोजना वित्‍त वर्ष 2013-14 में प्रारंभ की थी। इन शौचालयों के निर्माण से लगभग कुल 11363 छात्र शौचालयों लाभान्वित हो रहे हैं जिसमें से 53 प्रतिशत छात्र जबकि 47 प्रतिशत छात्राएं हैं।


  3. स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान के तहत हरियाणा में शौचालयों का निर्माण

    मानव संसाधन विभाग ने आईआईएफसीएल को हरियाणा राज्‍य में स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान के तहत शौचालय के निर्माण के लिए एक विद्यालय आबंटित किया था। आईआईएफसीएल ने जीएमएस विद्यालय, सहराला, पलवल (हरियाणा) में आबंटित शौचालय ब्‍लॉक का निर्माण पूरा किया। चार शौचालय इकाईयों से युक्‍त ये शौचालय छात्राओं के लिए बनाए गये हैं एवं इससे इस विद्यालय में वर्तमान में पढ़ने वाली लगभग 75 छात्राओं के लाभान्वित होने की उम्‍मीद है।

  4. स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान के तहत मेघालय में शौचालयों का निर्माण

    आईआईएफसीएल ने स्‍वच्‍छ विद्यालय तहत मेघालय में भी 251 शौचालय ब्‍लॉकों का निर्माण किया है। इन आबंटित शौचालय ब्‍लॉकों का निर्माण मेघालय के पूर्वी खासी के पहाड़ी जिले के 92 विद्यालयों में किया जाएगा एवं वित्‍त वर्ष 2015-16 में ये निर्माण पूरा होने की उम्‍मीद है।

    इसके अतिरिक्‍त आईआईएफसीएल ने अपने सीएसआर पहल के तहत स्‍वच्‍छ भारत कोष एवं स्‍वच्‍छ गंगा कोष में पांच-पांच करोड़ रुपये की निधि का भी अंशदान किया है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ क्रमश: राजकीय विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण एवं पावन गंगा नदी की सफाई शामिल है।

    आईआईएफसीएल अपने सीएसआर पहल के तहत निर्मित शौचालयों को पानी की आपूर्ति करना भी सुनिश्चित करता है। यदि पानी का स्रोत उपलब्‍ध नहीं है तो आईआईएफसीएल इन शौचालयों को पानी की आपूर्ति करने के लिए पंप से चलने वाले बोरवेल का वित्‍तपोषण करता है। इसके अतिरिक्‍त आईआईएफसीएल इन शौचालयों के निर्माण एवं छात्रों, अभिभावकों व अध्‍यापक/अध्‍यापिकाओं को शौचालय के उपयोग एवं इसके रखरखाव पर परामर्श देने के लिए पेशेवरों की सेवाएं भी लेता है।

दिव्‍यांगों का सशक्‍तीकरण

आईआईएफसीएल ने एएलआईएमसीओ की साझेदारी के साथ इस कार्यकलाप की शुरूआत दिव्‍यांगां को सहायक सहायता उपकरण के वितरण के लिए की। मिजोरम एवं आंध्र प्रदेश के कुल 364 लाभार्थियों ने इस कार्यक्रम के तहत दिव्‍यांगों के बेहतर जीवन के लिए उपयोगी ह्वील चेयर, श्रवण संबंधी उपकरण इत्‍यादि के रूप में सहायक उपकरण प्राप्‍त किए।