IIFCL

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सिफ्टी

सिफ्टी

इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनेंस कंपनी लि. (आईआईएफसीएल) नामक विशेष प्रयोजन माध्‍यम से अर्थक्षम अवसंरचना परियोजनाओं के वित्‍तपोषण हेतु योजना (यथा 19 मार्च, 2020 से लागू)

1. प्रस्‍तावना

  1. जबकि भारत सरकार का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों की भौतिक आधारिक संरचना की उपलब्धलता में भारी कमी है एवं यह कि इससे आर्थिक विकास अवरूद्ध हो रहा है।
  2. जबकि बुनियादी ढांचे के विकास में वर्तमान में उपलब्ध कर्ज की निधियों के संपूरण के लिए दीर्घ अवधि की परिपक्वकता के कर्ज की आवश्यकता है; एवं
  3. जबकि भारत सरकार का मानना है कि ऐसे कर्ज आमतौर पर निम्नलिखित बाधाओं के कारण उपलब्ध नहीं होते हैं:
    1. बाजार से दीर्घ अवधि के कर्ज जुटाने के लिए मानक (बैंचमार्क) दरों का उपलब्ध न होना,
    2. अधिकांश वित्तीय संस्थानों के मामले में कर्ज की अवधि का आस्ति – देयता में असंतुलन होना; एवं
    3. दीर्घ अवधि के कर्ज की अत्यधिक लागत होना
  4. अत: अब भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं की व्यायवहारिकता में सुधार लाने में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए निम्नलिखित योजना प्रभाव में लाई जाय।

2. संक्षिप्त नाम एवं विस्तार

  1. इस योजना को अर्थक्षम अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण की योजना कहा जाएगा। यह योजना आईआईएफसीएल के माध्यम से वित्त मंत्रालय द्वारा शासित होगी।
  2. यह संशोधित योजना 30 मार्च, 2015 से प्रभावी होगी।

3. परिभाषाएं

इस योजना में जब तक संदर्भ में अन्‍यथा अपेक्षित न हो:

  1. अधिकारप्राप्त समिति से इस योजना के प्रयोजनार्थ संयोजक के तौर पर सचिव (आर्थिक कार्य), सचिव, नीति आयोग, सचिव (व्यय) एवं संयोजक के तौर पर सचिव (वित्तीय सेवाएं) एवं उनकी अनुपस्थिति में इस विषय पर संव्यवहार करने वाले मंत्रालय के विशेष सचिव/अपर सचिव (वित्तीय सेवाएं) एवं सचिव को मिलाकर गठित समिति अभ्रिप्रेत है।
  2. आईआईएफसीएल से इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लि. (कंपनी अधिनियम, 1956 के अधीन निगमित कंपनी) अभिप्रेत है।
  3. अग्रणी बैंक से वह बैंक/वित्तीय संस्थान (एफआई) अभिप्रेत है जो परियोजना का वित्त पोषण करता है एवं अंतर-संस्थागत समूह अथवा बैंक/वित्तीय संस्थानों के संघ की रीति से निर्दिष्ट है। एक से अधिक बैंककारी व्यवस्थाओं के मामले में वह बैंक/संस्थान जिसका सबसे बड़ा एक्‍सपोजर होगा उसे अग्रणी बैंक समझा जाएगा।
  4. दीर्घावधि कर्ज से परियोजना कंपनी को आईआईएफसीएल द्वारा प्रदत्त कर्ज अभ्रिपेत है जहां पुनर्भुगतान के लिए डोर टू डोर टेन्‍यौर 10 वर्ष से अधिक है। हालांकि परियोजना ऋणों के मामले में जहां ऋणदाताओं के सहायता संघ द्वारा लचीला संरचना मॉडल (5/25 मॉडल) अपनाया गया है, पुनर्भुगतान की डोर टू डोर टेन्‍यौर 5 वर्ष होना चाहिए।
  5. आईआईएफसी (यूके) लिमिटेड के मामले में कर्ज की डोर टू डोर टेन्‍यौर भारतीय रिजर्व बैंक की मौजूदा मानदंडों के अनुसार बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) पर न्‍यूनतम अवधि के बराबर अथवा उससे अधिक होनी चाहिए।
  6. निजी क्षेत्र की कंपनी से वह कंपनी अभ्रिप्रेत है जिसमें 51 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंशदान एवं चुकता इक्विटी निजी संस्थाओं द्वारा स्वाधिकृत एवं नियंत्रित है।
  7. परियोजना कंपनी से वह कंपनी अभिप्रेत है जो उस बुनियादी ढांचे की परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है जिसके लिए आईआईएफसीएल द्वारा सहायता दी जानी है।
  8. परियोजना अवधि से जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना हेतु अनुबंध अथवा रियायती करार की अवधि अभ्रिप्रेत है।
  9. जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना से उपयोगकर्ता प्रभारों के भुगतान पर बुनियादी ढांचे की सेवा उपलब्ध कराने में एक ओर सरकार अथवा सांविधिक संस्था एवं दूसरी ओर निजी क्षेत्र की कंपनी के बीच अनुबंध अथवा रियायती करार पर आधारित परियोजना अभिप्रेत है।
  10. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी से वह कंपनी अभिप्रेत है जिसमें 51 प्रतिशत अथवा उससे अधिक अंशदान एवं चुकता इक्विटी केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग रूप से स्वाधिकृत एवं नियंत्रित है एवं लोक उद्यम विभाग एवं कंपनियों द्वारा निर्दिष्ट कोई उपक्रम शामिल है जिसमें अधिकांश हिस्सेदारी वित्तीय संस्थानों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा धारित है।
  11. कुल परियोजना लागत से परियोजना की कुल पूंजीगत लागत अभ्रिप्रेत है जो अग्रणी बैंक द्वारा इस शर्त के अधीन अनुमोदित है कि आईआईएफसीएल नियंत्रक कंपनी से अथवा किसी अन्य अवलंब के स्वरूप में गारंटी मांगते हुए पीपीपीएसी (जन निजी भागीदारी अनुमोदन समिति) द्वारा अनुमोदित लागत एवं अग्रणी बैंक द्वारा अनुमोदित लागत के बीच जोखिम कवर करने में समर्थ हो।
  12. गौण कर्ज से वह कर्ज अभ्रिप्रेत है जिसकी श्रेणी प्रतिभूति में सममात्रा प्रभार का वहन करने वाले परियोजना कर्ज की तुलना में कम हो।

4. आईआईएफसीएल हेतु वित्तपोषण के स्रोत

  1. इक्विटी के अतिरिक्त आईआईएफसीएल का वित्‍तपोषण निम्नलिखित स्रोतों से जुटाये गये कर्ज के माध्यम से किया जाएगा:
    1. प्रयोजन के लिए सृजित यथोचित साधनों के माध्यम से बाजार से जुटाया गया कर्ज: यद्यपि आईआईएफसीएल सामान्य तौर पर ब्याज दर व्यावस्था के अंतर्गत आने वाले अत्यधधिक लागत के कर्ज के पुनर्भुगतान/अग्रभुर्गतान के प्रयोजनार्थ 10 वर्ष एवं उससे अधिक की परिपक्‍वता के कर्ज जुटाएगा लेकिन आईआईएफसीएल अल्प अवधि के ऋण भी जुटा सकता है।
    2. द्विपक्षीय अथवा बहु पक्षीय संस्थान जैसे विश्व बैंक अथवा एशियाई विकास बैंक से कर्ज। भारत सरकार की पूर्व अनुमति से जुटाये गये बाहरी वाणिज्यिक उधार सहित विदेशी मुद्रा के कर्ज।
    3. बैंकों/वित्तीय संस्थानों से अल्प अवधि के कर्ज जो केवल आस्ति – देयता असंतुलन अथवा किसी भी समय को देखते हुए अपने निवल मालियत के पुनर्वित्त के प्रयोजनार्थ हो।
  2. आईआईएफसीएल जब कभी आवश्यक हो निधियां जुटायेगा। यह निधि इस तरह जुटाई जाएगी जिसका उपयोग आगे उधार देने के लिए किया जा सके एवं अधिशेष निधि का निवेश विपणनीय सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक एवं टी-बिल) एवं/अथवा जमा प्रमाणपत्र, सावधि जमा एवं कोषागार प्रबंधन के प्रयोजनार्थ, एएए मूल्यांकित सार्वजनिक क्षेत्र के कार्पोरेट बंधपत्रों में किया जा सकता है।
  3. आईआईएफसीएल द्वारा लिया गया ऋण भारत सरकार द्वारा गारंटीकृत हो सकता है। प्रदत्त गारंटी की सीमा वित्त मंत्रालय द्वारा राजकोषीय उत्तररदायित्व तथा बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत उपलब्ध सीमाओं के भीतर प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरूआत में निर्धारित कर ली जाएगी।
  4. आईआईएफसीएल एवं आईआईएफसी (यूके) द्वारा देय गारंटी शुल्क वही होगा जो समय-समय पर वित्त मंत्रालय विनिश्चित करे।
  5. गारंटी के लिए शर्त सहित गारंटियों की सुविधा की समय-समय पर वित्त मंत्रालय में समीक्षा की जाएगी एवं उसे जारी रखना समीक्षा के परिणाम पर निर्भर करेगा।

5. परियोजना के लिए पात्रता संबंधी मानदंड

  1. आईआईएफसीएल केवल वाणिज्यिक रूप से अर्थक्षम परियोजनाओं का ही वित्तपोषण करेगा। अर्थक्षम परियोजनाओं में वे परियोजनाएं भी शामिल हो सकती हैं जो सरकारी योजना के तहत अर्थक्षम संबंधी अंतर के वित्तपोषण प्राप्त करने के पश्चात अर्थक्षम होगी।
  2. इस योजना के तहत वित्तपोषण हेतु पात्र होने के उद्देश्य से परियोजना निम्न्लिखित मानदंड पूरा करेगी।
    1. परियोजना निम्नलिखित द्वारा कार्यान्वित (अर्थात परियोजना अवधि के लिए विकसित, वित्त पोषित एवं संचालित) होगी:
      1. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी
      2. पीपीपी पहल के तहत चयनित निजी क्षेत्र की कंपनी; अथवा
      3. निजी क्षेत्र की कंपनी
  3. परंतु आईआईएफसीएल इस योजना के तहत जन निजी भागीदारी की उन परियोजनाओं को ऋण देने में सबसे अधिक प्राथमिकता देगी जो प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रियाओं के माध्यम से चयनित निजी क्षेत्र की कंपनियों के द्वारा कार्यान्वित हो।
  4. परंतु यह भी कि आईआईएफसीएल निजी कंपनियों द्वारा स्थापित परियोजनाओं को इस शर्त पर सीधे ऋण प्रदान कर सकता है कि आईआईएफसीएल के ऋण की अवधि वाणिज्यिक कर्ज की लंबी अवधि से कम न हो। हालांकि चूंकि आईआईएफसीएल की स्‍थापना दीर्घावधि कर्ज प्रदान करने के उद्देश्‍य से की गई थी अत: वाणिज्यिक कर्ज से लंबी अवधि वाली परियोजनाओं को ऋण देने का प्रयास किया जाएगा।
  5. परंतु रेलवे की परियोजनाओं के मामले में जो निजी क्षेत्र की कंपनी के प्रचालन के अधीन नहीं है उस पर अधिकारप्राप्त समिति ऐसी कंपनियों द्वारा ऐसी परियोजना के प्रचालन से सबंधित पात्रता संबंधी मानदंड में छूट दे सकती है।
  6. ये परियोजना निम्नलिखित क्षेत्रों में से एक हो सकती है:
  7. क्र.सं. वर्ग अवसंरचना उप-क्षेत्र
    1 परिवहन एवं लॉजिस्‍टक सड़क एवं पुल
    पत्‍तन1
    पोत कारखाना2
    अंतरदेशीय जलमार्ग
    एयरपोर्ट
    इलेक्ट्रिकल एवं सिगनल प्रणाली, सुरंग, पुल, सेतु सहित रेल ट्रैक
    कारखाने एवं संबद्ध रखरखाव की सुविधाओं के साथ रेलवे रोलिंग स्‍टॉक
    स्‍टेशन एवं समीपवर्ती वाणिज्यिक अवसंरचना सहित रेलवे टर्मिनल अवसंरचना शहरी सार्वंजनिक परिवहन (शहरी सड़क परिवहन के मामले में रोलिंग स्टॉक को छोड़कर)
    लॉजिस्टिक अवसंरचना3
    2 ऊर्जा विद्युत उत्पादन
    विद्युत पारेषण
    विद्युत वितरण
    तेल पाइपलाइनें
    तेल/गैस/द्रवीभूत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भंडारण सुविधा4
    गैस पाइपलाइनें5
    3 जल एवं स्‍वच्‍छता ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन
    जल आपूर्ति पाइपलाइनें
    जल शोधन संयत्र
    मलव्‍यय संग्रहण, प्रबंधन एवं निपटान प्रणाली
    सिंचाई (बांध, चैनल, तटबंध इत्यादि)
    स्‍टोर्म वाटर निकास प्रणाली
    पतले मसाले की पाइपलाइनें
    4 संचार दूरसंचार (फिक्‍स्‍ड नेटवर्क)6
    दूरसंचार टॉवर
    दूरसंचार एवं दूरसंचार सेवाएं
    5 सामाजिक एवं वाणिज्यिक अवसंरचना शिक्षण संस्थाएं (कैपिटल स्टॉक)
    खेलकूद अवसंरचना7
    अस्‍पताल (कैपिटल स्टॉक)8
    पर्यटन अवसंरचना अर्थात (I) एक मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों से बाहर अवस्थित तीन सितारा अथवा उच्चत्‍तर श्रेणी के वर्गीकृत होटल (II) रोपवे एवं केबल कार
    औद्योगिक पार्क, तथा फूड पार्क, टैक्‍सटाइल पार्क, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), पर्यटन सुविधा तथा कृषि बाजार जैसी औद्योगिक गतिविधि सहित अन्‍य पार्कों हेतु साझी अवसंरचना
    कृषि एवं बागवानी उपज हेतु शीत भंडारण सहित कटाई उपरांत भंडारण अवसंरचना
    टर्मिनल बाजार
    मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं:
    प्रशीतन श्रृंखला9
    सस्‍ते आवास10

टिप्‍पण:

  1. बडे तलकर्षण शामिल हैं।
  2. "पोत कारखाने" को तैरती हुई अथवा तटीय, घुमावदार बंदरगाह, लंगरगाह और डॉकिंग सुविधा, जलावतरण मंच और/अथवा पोत उठाव की आवश्‍यक विशेषताओं वाले जल पर अथवा भूमि पर स्थित सुविधा के रूप में परिभाषित किया गया है, और जो पोत निर्माण/मरम्‍मत/पोत तोडने के कार्यकलाप करने में सक्षम है।
  3. "लॉजिस्टिक अवसंरचना" में न्‍यूनतम 50 करोड रुपये के निवेश तथा 10 एकड़ के न्‍यूनतम क्षेत्रफल के साथ अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी), 15 करोड़ रुपये के न्‍यूनतम निवेश तथा 20,000 वर्ग फुट के न्‍यूनम क्षेत्रफल के साथ शीत श्रृंखला सुविधा तथा/अथवा 25 करोड़ रुपये के न्‍यूनतम निवेश तथा 1 लाख वर्ग फुट के न्‍यूनतम क्षेत्रफल के साथ भंडार गृह सुविधा सहित बहुविध लॉजिस्‍टक्‍स पार्क सम्मिलित है।
  4. कच्‍चे तेल का महत्‍वपूर्ण भंडारण शामिल है।
  5. शहरी गैस संवितरण नेटवर्क शामिल है।
  6. ऑप्टिक फाइबर/वॉयर/केबल नेटवर्क, जो ब्राडबैंड/इंटरनेट उपलब्ध कराते हैं, शामिल हैं।
  7. खेलकूद एवं खेलकूद से संबंधी कार्यकलाप में प्रशिक्षण/अनुसंधन के लिए प्रशिक्षणशालाओं हेतु खेलकूद स्‍टेडियम और अवसंरचना का प्रावधान शामिल है।
  8. चिकित्‍सा कॉलेज, पैरा – चिकित्‍सा कॉलेज प्रशिक्षण संस्‍थान तथा नैदानिक केन्‍द्र शामिल हैं।
  9. कृषि तथा संबंद्ध उताद, समुद्री उत्‍पाद तथा मांस के परिरक्षण अथवा भंडारण हेतु खेत स्‍तर की प्री-कूलिंग हेतु प्रशीतन कक्ष सुविधा शामिल है।
  10. ‘’सस्‍ते आवास’’ को एक ऐसी आवासीय परियोजना के रूप में परिभाषित किया गया है जिनमें अधिकतम 60 वर्ग मीटर के कार्पेट क्षेत्रफल@ वाली आवासीय इकाई के लिए फर्श क्षेत्रफल अनुपात (एफएसआर)/फ्लोर स्‍पेस इंडेक्‍स (एफएसआई) के कम से कम 50 प्रतिशत का उपयोग किया गया है।

@’’कारपेट क्षेत्रफल’’ का वही अर्थ होगा जो स्‍थावर संपदा (विनियम एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 2 के खंड (ट) में दिया गया है। इसके अतिरिक्त इस खंड के तहत सिफ्टी में बुनियादी ढाचां संबंधी उप क्षेत्रों की सूची का अद्यतन स्वत: हो सकता है जब कभी भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सूची का अद्यतन किया जाता है।
आईआईएफसी (यूके) लि. के मामले में यथा लागू निम्नलिखित क्षेत्र जोड़े जाते हैं:

  1. मोबाइल टेलीफोनी सेवाएं/सेल्युलर सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियां
  2. अन्वेषण एवं
  3. खनन
  4. परिष्करण

इसके अतिरिक्त इस खंड में अवसंरचना उप क्षेत्रों से संबंधित संशोधन स्वत: हो सकता है जब भी भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (ईसीबी दिशानिर्देश) द्वारा बदलाव किया जाता है।

  1. केवल ऐसी परियोजनाएं, जो प्रत्यक्ष तौर पर उधारकर्ता कंपनी द्वारा अथवा बिना अवलंब आधार पर विशेष प्रयोजन माध्यम से कार्यान्वित की जा रही हैं एवं जहां कर्ज दायित्वों (उदाहरर्णाथ डीएसआरए) का शोधन सुरक्षित करने के लिए निलंब खाता अथवा अन्य यथोचित तंत्र विद्यमान है, आईआईएफसीएल से वित्तपोषण का पात्र होगी।
  2. ऐसी स्थिति में आईआईएफसीएल को परियोजना की पात्रता के संबंध में कोई स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो तो मामला उचित निर्देश हेतु अधिकारप्राप्त सीमिति को भेजा जा सकता है।
  3. पीपीपीएसी/ईसी/ईआई द्वारा अनुमोदित पीपीपी परियोजनाओं के मामले में जिनमें समापन पर प्राधिकार द्वारा बाईबैक का अनिवार्य प्रावधान है, आईआईएफसीएल अन्य ऋणदाताओं की तुलना में सर्वाधिक अवधि वाले ऋण का प्रस्ताव कर सकता है एवं अन्य ऋणदाताओं को राशि चुकाने के पश्चात एकमात्र ऋणदाता रह सकता है यदि आवश्यक हो।

6. अग्रणी बैंक द्वारा मूल्यांकन एवं निगरानी

  1. आईआईएफसीएल अग्रणी बैंक अथवा प्रतिष्ठित मूल्यांकनकर्ता संस्थान/बैंक/अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान के मूल्यांकन के आधार पर परियोजना के लिए ऋण संस्वीकृत करने पर विचार करेगा। आईआईएफसीएल अपने स्व‍यं के मूल्यांकन के आधार पर भी ऋण संस्वीकृत करने पर विचार कर सकता है एवं अग्रणी ऋणदाता की भूमिका निभा सकता है।
  2. ऐसे मूल्यांकन के आधार पर आईआईएफसीएल निम्नलिखित अनुच्छेद 7 में स्पष्ट की गई सीमा तक के वित्तपोषण पर विचार कर सकता है एवं अनुमोदन कर सकता है।
  3. अग्रणी बैंक नियमित निगरानी जारी रखेगा एवं सहमत करार एवं कार्य निष्पादन स्तर के साथ परियोजना के अनुपालन का समय-समय पर मूल्यांकन करेगा। अग्रणी बैंक आईआईएफसीएल को आवधिक प्रगति रिपोर्ट भेजेगा। आईआईएफसीएल अपनी स्वयं की परियोजनाओं की नियमित निगरानी भी कर सकता है।

7. वित्तपोषण के माध्‍यम

  1. आईआईएफसीएल निम्नलिखित तरीकों से अर्थक्षम परियोजनाओं का वित्तपोषण कर सकता है:
    1. दीर्घावधि ऋण;
    2. बैंकों,सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों एवं अवसंरचना केन्द्रित वित्‍तीय संस्‍थानों को उनके द्वारा प्रदान किए ऋणों के लिए पुनर्वित्त
    3. टेकआउट वित्तपोषण
    4. गौण ऋण
    5. ऋण संवृद्धि
    6. एनबीएफसी-आईएफसी को लागू किसी विनिर्दिष्‍ट योजना के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमत कोई अन्य माध्‍यम।
    7. केन्‍द्र सरकार द्वारा समय-समय पर अनुमोदित योजना/व्‍यवस्‍था के तहत कोई अन्‍य माध्‍यम।

    परंतु यह भी कि आईआईएफसीएल एवं आईआईएफसीएल (यूके) अपने ऋण के हिस्‍से को दिवाला एवं दिवालियापन संहिता या किसी अन्‍य नियामक व्‍यवस्‍था के तहत समाधान प्रक्रिया के हिस्‍से के तौर पर इक्विटी (अथवा इक्विटी जैसी लिखत) में बदल सकता है।

  2. प्रत्‍यक्ष ऋण के मामले में आईआईएफसीएल द्वारा किसी भी परियोजना कंपनी को प्रदान किया गया कुल ऋण कुल परियोजना लागत के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। टेकआउट वित्तपोषण के मामले में आईआईएफसीएल द्वारा टेकआउट वित्तपोषण सहित कुल ऋण राशि कुल परियोजना लागत के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। ऋण का संवितरण बैंकों/वित्तीय संस्थानों द्वारा संवितरित किए गये ऋण के अनुपात में किया जाएगा। उपरोक्त एक्‍सपोजर लागू विनियामक मानदंडों के अधीन होगा।
  3. आईआईएफसीएल द्वारा प्रभारित ब्याज दर उसके आधार दर के आधार पर निर्धारित की जाएगी जो प्रशासनिक लागत, निवल मूल्य पर औसत प्रतिलाभ एवं गारंटी शुल्क की लागत इत्यादि सहित निधियों की औसत लागत के आधार पर टेकआउट वित्तपोषण से ली जाएगी।
  4. परियोजना आस्तियों पर प्रभार परियोजना ऋण (गौण ऋण को छोड़कर) के समरूप होगा एवं परियोजना ऋण (गौण ऋण को छोड़कर) की अवधि के आगे तब तक जारी रहेगी जब तक कि आईआईएफसीएल द्वारा ऋण पर दी गई राशि तथा उस पर उपार्जित ब्याज और अन्य प्रभार की राशि बकाया रहे।
  5. गौण कर्ज

  6. परंतु आईआईएफसीएल निम्नेलिखित शर्तों के अधीन गौण कर्ज उपलब्ध करा सकता है:
    1. परियोजना खुली प्रतिस्पीर्धी बोली के माध्यम से प्रदान की गई हो;
    2. यह जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के सूत्रीकरण, मूल्यांकन एवं अनुमोदन हेतु जारी दिशानिर्देशों के तहत पीपीपीएसी द्वारा अथवा बुनियादी ढांचे में पीपीपी परियोजना को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के दिशानिर्देंशों के तहत अधिकारप्राप्त संस्थान द्वारा अनुमोदित हो;
    3. रियायती करार में निलंब खाते के लिए प्रावधान किया गया हो जो इक्विटी पर प्रतिलाभ के भुगतान से पूर्व, गौण ऋण का वार्षिक पुनर्भुगतान सुनिश्चित करेगा।
    4. रियायती करार के समापन की स्थिति में, रियायत प्रदान करने वाला प्राधिकरण, निलंब खाते में रियायत की प्रचालन अवधि के दौरान जो मॉडल रियायती करार (एमसीए) में उल्लखित है, रियायत का लाभ उठाने वाले प्राधिकारी द्वारा या रियायत प्रदान करने वाले प्राधिकारी द्वारा चूक किए जाने पर गौण ऋण के कम से कम 80 प्रतिशत का समापन भुगतान के तौर पर भुगतान करेगा। जहां मॉडल रियायती करार (एमसीए) उपलब्ध न हो वहां इस तरह का प्रावधान सम्मिलित किया जाय।
    5. गौण कर्ज की राशि कुल परियोजना लागत के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी एवं उस अधिकतम सीमा का हिस्सा होगी यथा सिफ्टी के अनुच्छेद 7.2 में विनिर्दिष्ट है; एवं
    6. परियोजना कंपनी द्वारा किसी भी अथवा सभी स्रोतों से उधार लिये जाने वाले गौण कर्ज की राशि उसकी चुकता पूंजी एवं अभिदत्‍त पूंजी के आधे से अधिक नहीं होगी।
    7. गौण कर्ज के ऋणदाता का उधारकर्ता की वर्तमान व भावी दोनों सभी आस्तियों (प्राप्‍य सहित) पर द्वितीय प्रभार होगा ताकि गौण ऋण सुरक्षित हो सके यथा ऋण करार में उल्लिखित है। गौण कर्ज सुरक्षित करने के उक्त द्वितीय प्रभार सभी ऋणदाताओं के लिए उनके द्वारा प्रदान किए गये गौण ऋण के समतुल्य होंगे। उपरोक्त गौण कर्जदाताओं का द्वितीय प्रभार उनके द्वारा पूर्व में दिये गये ऋण के लिए प्रथम सममात्रा प्रभार के अधीन होंगे: एवं
    8. गौण कर्ज को इक्विटी के रूप में नहीं बदला जाएगा
  7. आईआईएफसीएल मामला दर मामला के आधार पर एवं खंड 7.5 (ड.- ज) के अनुपालन में अत्यावश्यक परिस्थितियों में केवल उन्‍हीं गैर-पीपीपी परियोजनाओं को ही गौण-ऋण सुविधा प्रदान कर सकता है जो बिजली क्षेत्र में चल रही हों।

8. जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना के लिए ऋण प्रदान करना

  1. जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के मामले में निजी क्षेत्र की कंपनी का चयन पारदर्शी तथा खुली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
  2. संबंधित सरकार द्वारा विधिवत अनुमोदित मानकीकृत/मॉडल दस्तावेजों पर आधारित जन निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं को वरीयता दी जाएगी। स्टैंडअलोन दस्तावेजों की आईआईएफसीएल द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी।
  3. खूली प्रतिस्पिर्धी बोली के माध्यम से प्रस्ताव आमंत्रित करने से पूर्व संबंधित सरकार अथवा सांविधिक संस्था इस योजना के तहत वित्तीय सहायता हेतु आईआईएफसीएल के सैद्धांतिक अनुमोदन की मांग कर सकती है। बोली पूर्व चरण में आईआईएफसीएल द्वारा दिया गया कोई भी संकेत अंतिम प्रतिबद्धता के तौर पर नहीं समझा जाएगा। आईआईएफसीएल द्वारा प्रदान किये जाने वाला वास्तविक ऋण परियोजना के वित्तीय समापन से पूर्व अग्रणी बैंक द्वारा किए गये मूल्यांकन द्वारा शासित होगा।

9. योजना की समीक्षा

  1. जब भी आवश्यक हो इस योजना की वित्त मंत्रालय, वित्तीय सेवाएं विभाग, भारत सरकार द्वारा समीक्षा की जा सकती है।
  2. आईआईएफसीएल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित होगा।
  3. सिफ्टी में संशोधन अधिकारप्राप्त समिति के स्तर पर किया जा सकता है जो वित्त मंत्री के अनुमोदन अधीन हो।