उत्पत्ति

अनवरत आर्थिक विकास तथा आजीविका स्तरों को प्रभावित करने के लिए आधारभूत संरचना की महत्वता सर्वव्यापी मान्यता-प्राप्त है| इसके अतिरिक्त, सम्पूर्ण विश्व में लाखों लोगों के पास, सड़क परिवहन, बिजली, सुरक्षित पेयजल उपयुक्त सफाई-व्यवस्था तथा संचार सुविधाओं का अभाव है| अपर्याप्त तथा असक्षम आधारभूत संरचना से उदगमित उच्चतम लेन-देन मूल्यों ने अर्थव्यवस्थाओं को अपने सम्पूर्ण आर्थिक क्षमता को साकार करने से रोका है|
भारतीय परिपेक्ष में, जबकि आधारभूत संरचना में निवेश के आकर्षण में कुछ प्रगति हुई है, आधारभूत संरचना पर कुल वार्षिक निवेश कि तुलना अन्य एशियन देशों से की जाए तब जहाँ उन देशो में यह 10 प्रतिशत है, वहीँ पर भारत में यह अभी भी जी.डी.पी के 4 प्रतिशत के आस-पास है| भारतीय अर्थव्यवस्था का गतिविज्ञान आधारभूत संरचना को जोर-शोर से अभियान चलाने में अवरोधी है|भारत के माननीय वित्त मंत्री ने, 2005-06 के लिए केंद्रीय बजट-पत्र प्रस्तुत करते हुए, देश में पर्याप्त आधारभूत संरचना के निर्माण के महत्व तथा आवश्यकता को स्वीकृती दी तथा निम्लिखित घोषणा की:

तीव्र आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है| भारत में सर्वाधिक सुस्पष्ट कमी आधारभूत संरचना के निवेश में कमी है तथा इसको आय-व्ययक के द्वारा वित्तपोषित करना चालू रखा जाएगा| हालाँकि, कई ऐसे आधारभूत संरचना परियोजनाएं हैं जो आर्थिक रूप से करने योग्य हैं, परन्तु वर्त्तमान स्थिति में, श्रोतों को इकठ्ठा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं| मैं यह प्रस्ताव रखता हूँ की ऐसी परियोजनाओं को वित्तीय विशिष्ट वाहक के द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है......| वित्तीय विशिष्ट वाहक का कार्य ऋण प्रदान करना होगा, विशिष्टतः दीर्घ-कालिक परिपक्वता का ऋण, प्रत्यक्ष रूप से योग्य परियोजनाओं को, जिससे की वे बैंक तथा वित्तीय संस्थानों से लिए ऋण को परिशिष्ट कर सकें| सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के प्रारंभ में वित्तीय विशिष्ट वाहक को ऋण सीमा की सूचना देगी|